यह एक गंभीर मानसिक स्थिति है, जो व्यक्ति की सोच, भावना और व्यवहार को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। इसमें लगातार उदासी, रुचियों में कमी, नींद न आना या ज्यादा आना, अत्यधिक थकान और नकारात्मक विचार आना आम है, जो दो सप्ताह से अधिक समय तक रह सकते हैं।

डिप्रेशन के प्रमुख लक्षण (Symptoms of Depression):
भावात्मक लक्षण (Emotional Symptoms): –
दिन भर उदास या खालीपन महसूस करना, छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन, भविष्य को लेकर निराशावादी सोच, और आत्मविश्वास में कमी।
रुचि में कमी:-
उन गतिविधियों में आनंद न आना जो पहले पसंद थीं।
शारीरिक लक्षण (Physical Symptoms):-
बहुत अधिक थकान या कमजोरी महसूस होना, नींद न आना (अनिद्रा) या बहुत अधिक सोना, वजन या भूख में अचानक बदलाव।
संज्ञानात्मक लक्षण (Cognitive Symptoms): –
किसी भी काम में ध्यान केंद्रित करने या निर्णय लेने में परेशानी।
गंभीर लक्षण:
खुद को नुकसान पहुँचाने या आत्महत्या के नकारात्मक विचार आना।
बच्चों/किशोरों में: –
व्यवहार में बदलाव, चिड़चिड़ापन, स्कूल में खराब प्रदर्शन, और सामाजिक रूप से दूर हो जाना।

डिप्रेशन से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय:-
नियमित दिनचर्या:-
सुबह उठने और रात को सोने का एक निश्चित समय बनाएं। यह मन को स्थिरता देता है।
व्यायाम और योग: –
नियमित शारीरिक गतिविधि (चलना, दौड़ना, योग) से एंडोर्फिन नामक ‘फील-गुड’ हार्मोन रिलीज होते हैं, जो मूड को बेहतर बनाते हैं।
पौष्टिक आहार: –
चीनी और तले हुए भोजन को कम करें, और पौष्टिक व संतुलित भोजन लें। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
सामाजिक जुड़ाव: –
दोस्तों, परिवार और प्रियजनों के साथ समय बिताएं। अकेलापन डिप्रेशन को बढ़ाता है।
मेडिटेशन (ध्यान) और श्वसन अभ्यास:-
साँस लेने के अभ्यास (प्राणायाम) या ध्यान से मन शांत रहता है और विचारों पर नियंत्रण मिलता है।
नकारात्मक विचारों से बचाव: –
नकारात्मकता से बचें। खुद के साथ समय बिताएं और अपनी रुचियों को पहचानें।
शराब/नशीले पदार्थों से बचें: –
शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन डिप्रेशन को और गंभीर बना सकता है।
पेशेवर मदद (काउंसलिंग):-
यदि उदासी बनी रहती है, तो थेरेपिस्ट (जैसे [Cognitive Behavioral Therapy – CBT]) से बात करने में संकोच न करें।


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